RTI क्‍या है। RTI Full Form क्‍या है।

दोस्‍तों आज भारत में विभिन्‍न कार्यो के लिए विभिन्‍न प्रकार के विभाग तथा बोर्ड है। इन्‍हीं में से एक है, सेबी। आज हम अपने लेख के माध्‍यम से आपको RTI क्‍या है, RTI Full Form के बारे में जानकारी हिन्‍दी भाषा से सरल शब्‍दों में उपलब्‍ध करा रहे है।

rti full form

RTI Ka Full Form :-

यहां हम आपको हिन्‍दी एवं अंग्रेजी दोनों में फुल फार्म बता रहे है:-

RTI Full Form In Hindi :-

सूचना का अधिकार

RTI Full Form In English :-

Right to Information

RTI क्‍या है:-

भारत में बहुत ही आवश्‍यक एवं महत्‍वपूर्ण सूचना का अधिकार से संबंधित अधिनियम उपलब्‍ध है, जिसे सूचना का अधिकारी अधिनियम (आर.टी.आई.) कहते है।

इसका प्रमुख कार्य सूचना के अधिकार से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करना है।

आर.टी.आई. अधिनियम 15.06.2005 (Right to Information Act 2005) को भारत की संसद में पारित किया गया था तथा यह 12.10.2005 से प्रभावी है।

RTI की प्रक्रिया:-

इस अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत भारत का कोई भी नागरिक, सार्वजनिक प्राधिकरण अथवा शासकीय निकायों से सूचना का अनुरोध कर सकता है,

उक्‍त विभाग अथवा निकाय को उक्‍त अनुरोध का जवाब शीघ्रता से तीस दिवस के अंदर देना आवश्‍यक होता है।

कुछ अन्‍य विषय जैसे याचिकाकर्ता के जीवन और स्‍वतंत्रा से संबंधित मामलों में सूचना 48 घंटो के भीतर प्रदान की जानी चाहिए।

RTI के बारे में :-

सूचना का अधिकार भारत के संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में शामिल नहीं है,

यह अनुच्छेद 19 (1) (क) के तहत अभिव्यक्ति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है और

अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार है।  

आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत अधिकारियों को सार्वजनिक प्राधिकरण कहा जाता है।

सार्वजनिक सूचना अधिकारी (पीआईओ) या लोक प्राधिकारियों में प्रथम अपीलीय अधिकारी क्रमशः आवेदन और अपील पर निर्णय लेने का अर्ध न्यायिक कार्य करते हैं।  

भारतीय संविधान के अधिकार बोलने की स्वतंत्रता ’में मौलिक अधिकार को मजबूत करने के लिए यह अधिनियम बनाया गया था।

चूंकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार में आरटीआई निहित है,

यह एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है। 

सूचना का अधिकार भारत के नागरिकों के एक मौलिक अधिकार को संहिताबद्ध करता है।

आरटीआई बहुत उपयोगी साबित हुई है,

लेकिन व्हिसल ब्लोअर्स प्रोटेक्शन एक्ट, 2011 द्वारा इसका प्रतिकार किया गया है।

सूचना के अधिकार अधिनियम का कार्य क्षेत्र:-

यह अधिनियम पूरे भारत में फैला हुआ है।

इसमें कार्यकारी, विधायिका और न्यायपालिका सहित सभी संवैधानिक प्राधिकरण शामिल हैं

अर्थात संसद या राज्य विधानमंडल के किसी अधिनियम द्वारा स्थापित या गठित कोई संस्था या निकाय।

इस अधिनियम में यह भी परिभाषित किया गया है कि

निकाय या प्राधिकरण सरकार द्वारा उपयुक्त निकायों के “स्वामित्व, नियंत्रित या पर्याप्त रूप से वित्तपोषित” या गैर-सरकारी संगठनों द्वारा “पर्याप्त रूप से वित्तपोषित, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निधियों सहित” सरकार के आदेश या अधिसूचना द्वारा स्थापित या गठित किए गए हैं।

निजी निकाय पर Right to Information .:-

निजी निकाय सीधे अधिनियम के दायरे में नहीं हैं।

सरबजीत रॉय बनाम दिल्ली इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन के निर्णय में केंद्रीय सूचना आयोग ने भी पुष्टि की कि

निजीकृत सार्वजनिक उपयोगिता कंपनियाँ RTI के दायरे में आती हैं।

निजी संस्थान और गैर सरकारी संगठन, जो सरकार से अपने बुनियादी ढांचे का 95% से अधिक धन प्राप्त करते हैं, अधिनियम के तहत आते हैं।

आर.टी.आई. का शासन और प्रक्रिया :-

भारत में सूचना का अधिकार दो प्रमुख निकायों द्वारा शासित है: 

1. केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) :

मुख्य सूचना आयुक्त जो सभी केंद्रीय विभागों और मंत्रालयों का प्रमुख होता है।

CIC अपने स्वयं के सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIO) के साथ, सीधे भारत के राष्ट्रपति के अधीन होता है।

2. राज्य सूचना आयोग :-

राज्य लोक सूचना अधिकारी या एसपीआईओ सभी राज्य विभाग और मंत्रालयों के प्रमुख होते हैं।

SPIO कार्यालय सीधे संबंधित राज्य के राज्यपाल के अधीन है।

राज्य और केंद्रीय सूचना आयोग स्वतंत्र निकाय हैं और केंद्रीय सूचना आयोग का राज्य सूचना आयोग पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है।

आर.टी.आई. के तहत सूचना के अनुरोध हेतु शुक्‍ल:-

एक नागरिक जो एक सार्वजनिक प्राधिकरण से कुछ जानकारी लेने की इच्छा रखता है,

को अपने आवेदन करने हेतु आवेदक करने हेतु निर्धारित शुल्‍क जमा करना होता है,

जो पोस्‍टल ऑर्डर या डी.डी. (डिमांड ड्राफ्ट) या बैंकर्स चेक के माध्‍यम से भुगतान किया जा सकता है।

आर.टी.आई. के अंतर्गत निर्धारित वंचित समुदाय के नागरिक को आर.टी.आई. के अंतर्गत सूचना प्राप्‍त करने हेतु शुल्‍क अदायगी से छूट प्रदान की गई है।

जिनको सूचना के अनुरोध पर शुल्‍क भुगतान की आवश्‍यकता नहीं है,

हालांकि आवेदक को सूचना प्रदान करने की लागत के लिए शुल्‍क भुगतान करने की आवश्‍यकता हो सकती है।

जिसके बारे में आर.टी.आई. अधिनियम के अनुसार पी.आई.ओ. (लोक सूचना अधिकारी) द्वारा सूचित किया जाता है।

सूचना प्रणाली पर डिजिटल अधिकार (rtionline):-

सूचना के अधिकार हेतु RTI Online Digital Portal  भी उपलब्‍ध है।

इसके माध्‍यम से नागरिको को इस अधिनियम  का उपयोग करने हेतु आवश्‍यक सभी जानकारीयां एक ही स्‍थान पर प्राप्‍त हो जाती है।

भारत सरकार के साथ-साथ विभिन्‍न राज्‍य सरकारों द्वारा भी आर.टी.आई. के डिजीटलीकरण हेतु विभिन्‍न तरह से के प्रयास किए जा रहे है।

Conclusion of RTI Full Form post :-

हमने इस पोस्‍ट RTI क्‍या है, RTI Full Form, के माध्‍यम से सेबी के बारे में हिन्‍दी भाषा में जानकारी देने का प्रयास किया गया है।

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